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60/84 श्री मातंगेश्वर महादेव
60/84 श्री मातंगेश्वर महादेव
द्वापर युग में एक ब्राम्हण थे सुगती। उनके यहां मतंग नामक पुत्र का जन्म हुआ। बालक अवस्था में ही मतंग क्रूर स्वभाव का हुआ। एक बार बालक मतंग अपी माता की गोद में बैठकर लकडी से अपने पिता को मार रहा था। पास खड़ी एक गर्दभी ने उससे कहा कि यह चांड़ाल नही, यह ब्राम्हण है। गर्दभी के वचन सुनकर बालक ने उससे कहा कि मुझे बताओं कि मै चांडाल कैसे हुआ। गर्दभी ने उससे उसकी पूरी कथा कह सुनाई। मतंग ने निश्चय किया कि वह ब्राम्हणत्व को प्राप्त करेगा। ऐसा प्रण कर वह तपस्या करने के लिए चला गया। कई वर्षो तक तपस्या करने के बाद इंद्र उसके सामने प्रकट हुए ओर उससे कहा कि तुम्हें जो चाहिए मांग लो। मतंग ने इंद्र से कहा कि उसे ब्राम्हणत्व चाहिए। इंद्र ने उससे कहा कि तुम चांडाल योनि में उत्पन्न हुए हो, तुम्हें ब्राम्हणत्व नही मिल सकता। इसके बाद भी मतंग ने कई हजार वर्षो तक तपस्या की ओर इंद्र ने कई बार उसे समझाने का प्रयास किया, परंतु मतंग ने अपना प्रण नही त्यागा, उसने गया में जाकर तप करना प्रारंभ कर दिया। एक बार फिर इंद्र उसे समझाने के लिए आए तो उसने इंद्र से कहा कि मुझे ब्राम्हणत्व कैसे प्राप्त होगा, मुझे उपाय बताएं। इंद्र ने कहा कि अवंतिकानगरी के महाकाल वन में सिद्धेश्वर महादेव के पूर्व में एक शिवलिंग है तुम उसका पूजन ओर दर्शन करों। मतंग इंद्र की बात सुनकर आवंतिका नगरी में आया ओर यहां शिवलिंग का पूजन ओर दर्शन किया। मतंग के पूजन से महादेव ने प्रसन्न होरक उसे दर्शन दिए ओर मतंग ब्रम्हलोक को प्राप्त हुआ। मतंग के पूजन के कारण शिवलिंग मतंगेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुआ। मान्यता है कि कोई भी क्रूर मनुष्य भगवान का पूजन करेगा वह शुद्ध होकर ब्रम्हलोक को प्राप्त करेगा।